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नाइट ड्यूटी

कानपुर में नाइट ड्यूटी कर रही एक कांस्टेबल को गंगा पुल के बीचों-बीच अपने छोटे भाई का ऑटो खाली खड़ा मिलता है — इंजन चालू, सीट पर खून — और सुबह होने से पहले उसे भाई को ढूंढना है।

Every document below came out of one screenplay, generated in Hindi rather than translated into it. Nothing here is a template or a mock-up — it is the same output the product produces for a real project.

40
Scenes
200
Pages
20
Shoot days
5
Characters

Synopsis

कानपुर रात में दो हिस्सों में बँट जाता है — इस पार जाजमऊ की चमड़ा फ़ैक्ट्रियाँ, उस पार शुक्लागंज। सुनीता की बीट इन्हीं के बीच पड़ती है, जहाँ देर रात सिर्फ़ ट्रक और आवारा कुत्ते बचते हैं। राजू घंटाघर के ऑटो स्टैंड पर चलता था — सवारी कम, उधारी ज़्यादा। पुल पर बिताई वह रात उसे अपने ही शहर के उस हिस्से में ले जाती है जिसे वर्दी पहनने के बाद उसने देखना बंद कर दिया था।

Theme: क्या कानून और व्यवस्था का पालन इंसानी रिश्तों और अपनों की जान बचाने की कीमत पर किया जाना चाहिए?

Story beats

The structural pass, before a line of dialogue exists — what each act has to do.

  1. Act 1 — लाल रोशनी और खामोश वायरलेस · 1-30

    यह अंक सुनीता की सामान्य नाइट ड्यूटी और कानपुर शहर की नीरस गश्त को स्थापित करता है, जो शुक्लागंज पुल पर राजू का ऑटो मिलने के साथ ही एक गंभीर मोड़ लेती है। सुनीता के सामने तुरंत यह विकल्प आता है कि वह पुलिस थाने में इस वारदात की आधिकारिक सूचना देकर जिम्मेदारी से हट जाए या नियम तोड़कर खुद खोज शुरू करे। इस अंक के अंत तक सुनीता अपने विभागीय वायरलेस को बंद करके अपने भाई की गुमशुदगी की निजी जांच में कदम रख देती है, जहाँ से वापसी का रास्ता बंद हो जाता है।

  2. Act 2 — अंधेरी गलियाँ और कड़वी सच्चाई · 31-90

    यह अंक सुनीता की अकेले की जा रही तफ़तीश और उससे सामने आने वाली भयानक सच्चाइयों को उकेरता है। अंक के शुरू में सुनीता अपने भाई की तलाश में बिना किसी पुलिस बैकअप के शहर की खतरनाक गलियों में उतरती है। अंक के अंत तक वह एक ऐसे जाल में फँस जाती है जहाँ उसके भाई पर लगा संगीन इल्ज़ाम और खुद उसकी अपनी नौकरी व जान दांव पर लग जाती है।

  3. Act 3 — आफ़ताब की पहली किरण और नया सवेरा · 91-120

    यह अंक सुनीता की बिना वर्दी और बिना अधिकार की अंतिम लड़ाई को दर्शाता है, जहाँ वह अपनी सूझबूझ से भ्रष्ट तंत्र का सामना करती है। गोदाम से भागकर सुनीता भोर की पहली किरण खिलने से पहले गंगा किनारे उस आखिरी ठिकाने पहुँचती है, जहाँ उसे राजू के कानपुर छोड़कर चले जाने का अंतिम सच और वजह मिलती है। अंक के अंत में सुनीता अपनी छिन चुकी खाकी के बिना भी एक नए नैतिक संतुलन के साथ खड़ी होती है, जहाँ उसका भाई भले ही दूर जा चुका है, लेकिन वह अब किसी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाएगी।

Characters

  • सुनीता यादव
    Protagonist

    उत्तर प्रदेश पुलिस में पीसीआर नाइट गश्त कांस्टेबल (कानपुर नगर)। शुक्लागंज गंगा पुल और आसपास के इलाकों में मोटरसाइकिल से गश्त करना, कंट्रोल रूम को वायरलेस पर स्थिति दर्ज कराना और शहर की नाइट ड्यूटी संभालना।. कठोर, अनुशासित और व्यावहारिक रवैये के पीछे एक अत्यधिक सुरक्षात्मक बहन का दिल छिपा है। वह क...

  • सत्यप्रकाश "सत्तू" शुक्ला
    Antagonist

    परेड चौराहे और गंगा किनारे के अवैध गोदामों का संचालक। वह ऊँचे ब्याज पर पैसे बाँटने, रंगदारी वसूलने और ट्रकों से चोरी का माल ठिकाने लगाने का गिरोह चलाता है।. शांत, अत्यधिक व्यावहारिक और क्रूर। वह खुद को शहर का रक्षक और गरीबों का मददगार मानता है क्योंकि वह जरूरतमंदों को तुरंत पैसा देता है, लेकिन इस...

  • इंस्पेक्टर रामेश्वर पांडे
    Supporting

    थाना प्रभारी / सीनियर सब-इंस्पेक्टर, कानपुर पुलिस। वह पिछले 28 सालों से पुलिस सेवा में है और परेड व शुक्लागंज क्षेत्र की कानून व्यवस्था का प्रभारी है। उसकी नौकरी का मुख्य काम कागजी खानापूर्ति करना, हफ़्ता वसूली के नेटवर्क को सुचारू रखना और थाने के अंदर किसी भी तरह के बड़े विवाद को दबाना है।. चाला...

  • चिंटू "मैकेनिक" गुप्ता
    Supporting

    परेड चौराहा ऑटो स्टैंड पर ऑटो चालक और अनधिकृत मैकेनिक। वह दिन भर ऑटो चलाता है और रात में चालकों की गाड़ियाँ ठीक करता है, जिससे उसे शहर की अवैध गतिविधियों और सत्तू के गुर्गों की आवाजाही की सीधी खबर रहती है।. चिंटू डरपोक, अवसरवादी और अत्यधिक सतर्क स्वभाव का युवक है। वह परेड चौराहे की ऑटो मंडी का ऐस...

  • बद्री निषाद
    Supporting

    सरसैया घाट का वरिष्ठ मल्लाह। तड़के चार बजे से गंगा में नाव खेना, घाट किनारे खड़ी नावों की रखवाली करना और भोर के धुंधलके में शहर से निकलने वाले यात्रियों को नदी पार कराना उसका रोज़ का काम है।. बद्री शांत, सख्त और कम बोलने वाला इंसान है। जीवन भर गंगा की लहरों और पुलिस-अपराधियों के खेल को पास से देख...

The screenplay

The opening, as formatted screenplay. The full script runs to 200 pages.

ACT 1

EXT. परेड चौराहा - NIGHT

कानपुर की कड़कड़ाती सर्द रात। परेड चौराहे की सड़कें पूरी तरह सुनसान हैं। दुकानों के लोहे के शटर गिरे हुए हैं और पुराने होर्डिंग्स कोहरे की धुंध में धुंधले दिखाई दे रहे हैं।

पीले रंग की स्ट्रीटलाइट की रोशनी में सफेद धुंध तैर रही है। दूर किसी गली से एक आवारा कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आती है।

सड़क पर उत्तर प्रदेश पुलिस की पीसीआर मोटरसाइकिल धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। उसके साइलेंसर की हल्की गड़गड़ाहट रात के सन्नाटे को चीरती है।

कांस्टेबल सुनीता यादव मोटरसाइकिल चला रही है। भारी खाकी जैकेट, पुलिस बूट और सिर पर हेलमेट। उसका चेहरा ठंडी हवा से सुन्न पड़ चुका है, लेकिन आँखों में तीखी एकाग्रता है।

चौराहे के गोल चक्कर के पास पहुँचकर वह मोटरसाइकिल की गति धीमी करती है। वह सड़क के दोनों तरफ अपनी टॉर्च की तेज़ रोशनी डालती है।

अचानक बाईं तरफ की तंग गली से एक पीला-हरा ऑटो रिक्शा तेज़ रफ्तार में बाहर निकलता है। उसकी हेडलाइट्स पूरी तरह बंद हैं।

ऑटो चौराहे पर बिना किसी संकेत के अचानक मुड़ता है। उसके पहिये सड़क की गीली गिट्टी पर घिसटते हैं और एक तीखी आवाज़ पैदा होती है।

सुनीता तुरंत मोटरसाइकिल का एक्सीलेटर घुमाती है। पीसीआर बाइक का सायरन एक पल के लिए गूँज उठता है।

वह बाइक को ऑटो के ठीक बगल में लाकर खड़ा कर देती है और हाथ के इशारे से ड्राइवर को किनारे रुकने का हुक्म देती है।

ऑटो चालक हड़बड़ाकर ब्रेक दबाता है। ऑटो सड़क किनारे बंद पड़ी चाय की दुकान के सामने जाकर रुकता है।

सुनीता बाइक को स्टैंड पर टिकाती है और नीचे उतरती है। उसकी चाल में कड़ा अनुशासन है।

वह टॉर्च जलाकर सीधी रोशनी ऑटो के ड्राइवर की सीट पर डालती है।

ड्राइवर की सीट पर बैठा आदमी आँखों पर हाथ रखकर रोशनी से बचता है। उसने गले में मटमैला मफलर लपेटा हुआ है।

सुनीता
गाड़ी की हेडलाइट बंद करके पचास की स्पीड में मोड़ काट रहे हो? उतरो नीचे।

ऑटो चालक
(बड़बड़ाते हुए)
मैडम जी, रात के पौने बारह बज रहे हैं। पूरी सड़क खाली पड़ी है, कोई सवारी भी नहीं है।

सुनीता
सड़क खाली है तो कानून खत्म हो गया? लाइसेंस और गाड़ी के कागज़ात निकालो।

ऑटो चालक मफलर ठीक करता है और झिझकते हुए अपनी जेबों में हाथ डालता है। उसकी जेब से कोई कागज़ात नहीं निकलते।

ऑटो चालक
कागज़ तो घर पर छूट गए हैं मैडम। अभी आख़िरी चक्कर लगाकर स्टैंड वापस जा रहा था। बस दो मिनट की दूरी है।

सुनीता टॉर्च की रोशनी नीचे घुमाकर ऑटो की पिछली सीट और फर्श पर डालती है। वह बहुत ध्यान से अंदर का मुआयना करती है।

सुनीता
कागज़ घर पर हैं, हेडलाइट खराब है, और पीछे की नंबर प्लेट मिट्टी से ढकी है। नाम क्या है तुम्हारा?

ऑटो चालक
रामपाल। मैडम जी, परेड चौराहे पर ही हमारी मैकेनिक की दुकान के पास रहते हैं। कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं।

सुनीता
गलत काम एक्सीडेंट होने के बाद शुरू होता है रामपाल। इस धुंध में बिना लाइट के कोई ट्रक चढ़ा देगा तो स्टैंड तक पहुँचने लायक भी नहीं बचोगे।

Script breakdown

Every element the script commits the production to — tagged scene by scene. This is what the schedule and the budget are computed from.

40
Scenes
29
Night
30
Speaking cast

Props

  • भारी लोहे की टॉर्च ×2
  • खून से सना नीला और सलेटी ऊनी मफलर ×1
  • घिसा हुआ भूरा चमड़े का बटुआ ×2
  • राजीव यादव का ड्राइविंग लाइसेंस ×2
  • निजी मोबाइल फोन ×2
  • वर्दी के कॉलर पर लगा वायरलेस सेट ×1
  • हनुमान जी का पीला ध्वज और लाल धागा ×1
  • ऑटो का पुराना टैक्स पर्चा और मुड़े हुए नोट ×1
  • मोटा भूरा हिसाब रजिस्टर ×1
  • काले कवर वाली पीसीआर गश्त लॉगबुक ×1
  • लाल स्याही वाली कलम ×1
  • चाय का आधा भरा कांच का गिलास ×1

Stunts and special requirements

  • वाहन स्टंटकोहरे में ओस से भीगी गीली सड़क पर पीसीआर मोटरसाइकिल को रपटाते हुए रोकना।
  • मोटरसाइकिल राइडिंगओस भरी गीली सड़क पर मोटरसाइकिल का पिछला पहिया फिसलकर ग्रिप पकड़ना और गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ाना।
  • वाहन ड्रिफ्टिंग एवं प्रिसिजन ड्राइविंगबिना हेडलाइट्स के तेज़ रफ्तार ऑटो का चौराहे पर अचानक तीखा मोड़ लेना और गीली गिट्टी पर पहियों का घिसटना।
  • मोटरसाइकिल स्टंटगीली डामर पर बाइक का पिछला पहिया घिसटाकर रोकना और ढलान पर बिना इंजन चालू किए बाइक सरकाना।
  • ऑटो को धक्का देनासुनीता दोनों हाथों से ऑटो को धक्का देकर पुल के जंगले के पास सटाती है
  • तेज़ बाइक ड्राइविंगसुनीता किक मारकर बाइक स्टार्ट करती है और संकरी ढलान से तेज़ी से उतरती है

Scene list

#Slug line
1EXT. परेड चौराहा - NIGHT
2INT. थाना कंट्रोल रूम - NIGHT
3EXT. परेड स्टैंड मार्ग - NIGHT
4EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - दृष्टिकोण - NIGHT
5EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - NIGHT
6EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - ऑटो का अंदरूनी भाग - NIGHT
7EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - NIGHT
8EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - NIGHT
9EXT. शुक्लागंज गंगा पुल - NIGHT
10EXT. शुक्लागंज गंगा पुल / शहर का मोड़ - NIGHT
11EXT. शुक्लागंज गंगा पुल – NIGHT
12EXT. परेड चौराहे की तंग गली – NIGHT
13EXT. परेड चौराहा – NIGHT
14INT. परेड चौराहे की दुकान – NIGHT
15EXT. परेड स्टैंड मार्ग – NIGHT
16EXT. गंगा किनारा मार्ग – NIGHT
17EXT. सत्तू का गोदाम - बाहर – NIGHT
18INT. सत्तू का गोदाम - प्रवेश द्वार – NIGHT
19INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
20INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
21INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
22INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
23EXT. सत्तू का गोदाम - बाहर – NIGHT
24INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
25INT. सत्तू का गोदाम - मुख्य कक्ष – NIGHT
26INT. सत्तू का गोदाम - गलियारा – NIGHT
27INT. सत्तू का गोदाम - पिछला हिस्सा – NIGHT
28EXT. सत्तू का गोदाम - पिछला अहाता – NIGHT
29EXT. शहर का किनारा मार्ग – NIGHT
30EXT. सरसैया घाट मार्ग – EARLY MORNING
31EXT. सरसैया घाट मार्ग – DAWN
32EXT. सरसैया घाट – DAWN
33EXT. सरसैया घाट – DAWN
34EXT. सरसैया घाट – DAWN
35EXT. सरसैया घाट – DAWN
36EXT. सरसैया घाट – DAWN
37EXT. शुक्लागंज गंगा पुल – MORNING
38EXT. शुक्लागंज गंगा पुल – MORNING
39EXT. शुक्लागंज गंगा पुल – MORNING
40EXT. शुक्लागंज गंगा पुल – MORNING

Shooting schedule

Scenes reordered out of script order and grouped so the unit moves as little as possible.

20
Shoot days
120.08
Pages
18
Locations
उच्च
Complexity
  • उत्पादन बाजार भारत (मुंबई/उत्तर भारत एफडब्ल्यूआईसीई मानक) माना गया है, जिसमें 6-दिवसीय कार्य सप्ताह और 8-घंटे की मानक शिफ्ट लागू होती है।
  • सभी 40 दृश्यों का कुल योग 120.00 पृष्ठ (960/8) है। प्रतिदिन औसतन 6 पृष्ठों का कवरेज रखा गया है।
  • नाइट-शूट्स के लंबे रन को एक साथ समूहित किया गया है ताकि क्रू की थकान कम हो और रात्रि विश्राम के लिए अनिवार्य टर्नअराउंड समय का पालन हो सके।
  • गंगा पुल और घाट पर आउटडोर शूटिंग के लिए सुरक्षा, अनुमति और ओस/कोहरे के व्यावहारिक प्रभावों का पूर्ण प्रावधान किया गया है।

Call sheet

One day of the schedule, expanded into the document the crew actually receives.

Shoot day 1Location परेड चौराहा एवं परेड स्टैंड मार्ग, कानपुरWeather TBD — check forecast closer to the shoot date
CallWhoNote
19:00#1 कांस्टेबल सुनीता यादवकॉस्ट्यूम और पुलिस वर्दी तैयारी, माइक फिटिंग
19:30#2 रामपाल (ऑटो चालक)ऑटो ड्राइवर गेटअप, मेकअप और स्टंट ब्रीफिंग

Your script, the same way

Everything above started as one screenplay. Upload yours and the breakdown, schedule and call sheet come from it — and every suggested edit opens an A/B compare, so nothing changes in your scene until you merge it.

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